TEMPLE CITY OF INDIA: भारत का मंदिरों का शहर

भारत का मंदिरों का शहर: TEMPLE CITY OF INDIA

TEMPLE CITY OF INDIA: भारत के किस शहर को कहा जाता है ‘मंदिरों का शहर’? जानिए इस प्राचीन नगरी की अद्भुत कहानी

TEMPLE CITY OF INDIA: भारत को सदियों से आस्था, आध्यात्मिकता और मंदिरों की भूमि के रूप में जाना जाता है। उत्तर में हिमालय की पवित्र वादियों से लेकर दक्षिण के समुद्री तटों तक, देश के हर कोने में भव्य मंदिर भारतीय संस्कृति और विश्वास की पहचान बने हुए हैं। यही कारण है कि भारत में कई शहर अपनी धार्मिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

लेकिन जब बात आती है मंदिरों के शहर’ की, तो सबसे पहले जिस शहर का नाम सामने आता है, वह है भुवनेश्वर

अगर आप भारत की आध्यात्मिक विरासत, प्राचीन इतिहास और अद्भुत वास्तुकला को करीब से देखना चाहते हैं, तो भुवनेश्वर आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

यह शहर सिर्फ मंदिरों का समूह नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता, कला और आस्था का जीवंत प्रतीक है।

TEMPLE CITY OF INDIA:ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को अक्सर “Temple City of India” यानी भारत का मंदिरों वाला शहर कहा जाता है। यह नाम इसे यूं ही नहीं मिला, बल्कि इसके पीछे सदियों पुरानी समृद्ध धार्मिक और स्थापत्य विरासत छिपी हुई है।

क्यों कहा जाता है भुवनेश्वर को मंदिरों का शहर?

भुवनेश्वर कभी प्राचीन कलिंग साम्राज्य का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। इतिहासकारों के अनुसार, इस शहर में एक समय 700 से अधिक मंदिर मौजूद थे, जिनमें से कई आज भी सुरक्षित हैं।

इन मंदिरों में कुछ की आयु एक हजार वर्ष से भी अधिक मानी जाती है। यही वजह है कि यह शहर केवल श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि इतिहासकारों, वास्तुकारों और यह जगह पर्यटकों के बीच भी खासा लोकप्रिय व आकर्षण का केंद्र है।

भुवनेश्वर नाम संस्कृत शब्द त्रिभुवनेश्वर’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है तीनों लोकों के स्वामी भगवान शिव। इस शहर की धार्मिक पहचान मुख्य रूप से भगवान शिव से जुड़ी हुई है।

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वास्तुकला का जीवंत संग्रहालय है भुवनेश्वर

भुवनेश्वर को सिर्फ मंदिरों की संख्या के कारण नहीं, बल्कि इसकी अद्भुत कलिंग वास्तुकला के कारण भी विशेष पहचान मिली है।

TEMPLE CITY OF INDIA:यहां के मंदिरों में नागर और द्रविड़ शैली का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। बलुआ पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी, ऊंचे शिखर, देवी-देवताओं की मूर्तियां और पौराणिक दृश्यों की कलात्मक प्रस्तुति इसे एक जीवंत संग्रहालय जैसा अनुभव कराती है।

लिंगराज मंदिर: भुवनेश्वर की शान

भुवनेश्वर के मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध है लिंगराज मंदिर

11वीं शताब्दी में सोमवंशी राजाओं द्वारा निर्मित यह मंदिर लगभग 180 फुट ऊंचा है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है।

मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं, नर्तकियों और पौराणिक जीवों की बेहद सुंदर नक्काशी की गई है। शिवरात्रि के दौरान यहां भव्य उत्सव और विशाल शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।

मुक्तेश्वर मंदिर: ओडिशा वास्तुकला का रत्न

10वीं शताब्दी में बना मुक्तेश्वर मंदिर अपनी उत्कृष्ट नक्काशी और सुंदर तोरण द्वार के लिए प्रसिद्ध है।

इसे अक्सर ओडिशा वास्तुकला का रत्न” कहा जाता है। मंदिर का प्रवेश द्वार चंद्राकार मेहराब की तरह दिखाई देता है, जिस पर बेहद बारीक शिल्पकारी की गई है।

यह मंदिर आध्यात्मिक शांति और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।

राजारानी मंदिर: पत्थरों में प्रेम और कला

12वीं शताब्दी का राजारानी मंदिर लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है, जिसके कारण इसे यह नाम मिला।

TEMPLE CITY OF INDIA:यह मंदिर अपनी दीवारों पर बनी कामुक और कलात्मक मूर्तियों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां की नक्काशी खजुराहो की कला शैली की याद दिलाती है।

आज भी यहां शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम और ओडिसी नृत्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं।

TEMPLE CITY OF INDIA

परशुरामेश्वर मंदिर: प्राचीनता की मिसाल

7वीं शताब्दी में निर्मित परशुरामेश्वर मंदिर भुवनेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में गिना जाता है।

TEMPLE CITY OF INDIA:मंदिर की बाहरी दीवारों पर 200 से अधिक मूर्तियां और शिल्पाकृतियां बनी हुई हैं, जिनमें दुर्गा, गणेश और शिवगणों के चित्र विशेष रूप से आकर्षक हैं।

अनंत वासुदेव मंदिर

13वीं शताब्दी का यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर की शैली में बने इस मंदिर की रसोई विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां रोजाना हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद तैयार किया जाता है।

ब्रह्मेश्वर मंदिर

11वीं शताब्दी में निर्मित ब्रह्मेश्वर मंदिर अपनी भव्य नक्काशी और शेरों की मूर्तियों के लिए जाना जाता है।

यह मंदिर भुवनेश्वर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आज भी जिंदा है मंदिरों के शहर की पहचान

भुवनेश्वर आज एक आधुनिक शहर होने के बावजूद अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संजोए हुए है।

TEMPLE CITY OF INDIA:यहां मंदिरों के बीच आधुनिक जीवन की हलचल, पर्यटन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान लगातार चलते रहते हैं। यही कारण है कि इसे आज भी भारत का मंदिरों का शहर कहा जाता है।

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